Sant Tulsidas in Great Epic Ramcharitamanasa

tulsidas

आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।।

सीय राम मय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी।।

 

सभी चौरासी लाख योनियों में चार प्रकार के (स्वेदज, अण्डज, उद्भिज्ज, जरायुज) जीव जल, पृथ्वी और आकाश में रहते हैं, उन सब से भरे हुए इस सारे संसार को श्री सियाराम के समान जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।

Eight million four hundred thousand species of living being, classified under four broad divisions, inhabit land, water and the air, Realizing the whole world to be pervaded by Sita and Rama, I make obeisance with folded hands.

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